भारत की बजट प्रणाली की सम्पूर्ण जानकारी


Budget

हम सभी ने बजट नाम तो बहुत सुना होगा और आम जीवन में भी हम कई बार बजट शब्द का प्रयोग करते है l  अर्थव्यवस्था  के विकास के लिए धन की पूर्ति करने हेतु बजट का निर्माण करना अत्यंत आवश्यक है l बजट द्वारा ही विकास की योजनाओं में धन की पूर्ति की जाती है और इन योजनाओं  के विकास द्वारा आम जन का विकास होता है l अपने इस लेख में में आपको बजट क्या होता है ,बजट के कितने प्रकार होते है ,बजट का महत्त्व , बजट शब्द की  उत्पत्ति ,भारत में बजट का प्रारंभ आदि अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे  में जानकारी देने वाली हूँ l तो चलिए जानते है बजट के बारे में l

बजट का अर्थ या परिभाषा -

"सामान्य शब्दों में यदि बजट को परिभाषित किया जाए तो बजट वह योजना है जो देश की आय व व्यय का संतुलित अनुमान लगाकर बनाई जाती है l"

एक आदर्श बजट वह बजट होता है जिसमे किसी का भी व्यक्तिगत स्वार्थ न हो और जो सभी के लिए सामान लाभप्रद हो चाहे वह किसी भी वर्ग का व्यक्ति हो l सामान्यतः देखा जाए तो एक सामान्य व्यक्ति भी बजट तैयार करता है वह अपनी मासिक आय के आधार पर अपने धन का व्यय करता है l उदहारण के तौर पर देखे तो - जैसे रमेश का मासिक वेतन 10000 रूपए है और वह अपने धन का व्यय किस प्रकार करेगा इसका एक बजट तैयार करता है कि किस मद पर कितना व्यय करेगा तो वह प्रयत्न करेगा की उसका कुल व्यय 10000  रुपये से कम हो ताकि वह बचत भी कर सके l  अतः वह अपनी आय के अनुरूप ही व्यय करेगा l इस प्रकार आम आदमी अपने व्यय को संतुलित कर सकता है l 

इसके विपरीत सरकारी बजट इससे कुछ भिन्न होता है l सरकार द्वारा तैयार किया जाने वाला बजट घाटे का बजट होता है l क्योकि भारत एक विकासशील देश है अतः सरकार द्वारा प्राप्त की जाने वाली आय व्यय की तुलना में कम होती है l सरकार बजट की राशि को जनहित के कार्यो में खर्च करती है l घाटे की पूर्ति को सरकार संचित निधि से या ऋण लेकर पूरा करती है और यह ऋण सरकार रिज़र्व बैंक से प्राप्त करती है l इससे बाज़ार में मुद्रा का प्रसार होता है l घाटे का बजट मंदी की स्थति व आर्थिक विकास हेतु भी बनाया जाता है l और इस प्रकार का बजट भारत को मंदी की स्थति से बहार निकलने के लिए एक उपयुक्त दवाई है l

बजट से जनता को सरकार की जनहित नीतियों का पता लगता है की सरकार किस मद पर कितना खर्च कर रही है l सरकार द्वारा लगाये जाने वाले करो के बारे में भी बजट में वर्णन होता है l एक अच्छा बजट देश को आर्थिक तंगी से निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और देश की उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है l

History of budget

बजट शब्द की उत्पत्ति का इतिहास -

बजट शब्द की उत्पत्ति के विषय में यदि हम बात करे तो इसका एक छोटा सा इतिहास है l बजट शब्द की उत्पत्ति फ़्रांसिसी शब्द बूजेट  से हुई है l बजट शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है "चमड़े का एक थैला" l 1773 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री रोबर्ट वोलपोल ने इंग्लैंड के व्यय का एक ड्राफ्ट/ब्यौरा तैयार किया l और दस्तावेजो को चमड़े के एक थैले में रख लिया l जब उन्होंने वित्तीय  प्रस्ताव के दस्तावेजो को संसंद में चमड़े के थैले से   निकालकर पेश किया तो संसद में उपस्थित लोगो  ने   उनका मजाक उड़ाते हुए कहा की " The Budget Opened" अर्थात बजट खोला गया l और तभी से वार्षिक आय व्यय के विवरण को बजट के नाम से जाना जाने लगा l

बजट का प्रावधान -

अनुच्छेद 112 के अनुसार सरकार को प्रत्येक वित्तीय वर्ष अपना लेखा जोखा व आय व्यय का विवरण ससंद के समक्ष पेश करना होता है संविधान में परिभाषित इस वार्षिक वित्तीय विवरण को ही भारत का बजट कहते है l भारत का वार्षिक वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है जबकि पहले यह 1 मई से 31 अप्रैल तक था l एल के झा समिति ने वित्त वर्ष परिवर्तन पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी l बजट की तैयारी अक्टूबर नवम्बर से ही शुरू हो जाती है l बजट में तीन चीज़े शामिल की जाती है l

  1. पिछले वर्ष के अंतरिम आंकड़े 
  2. चालू वित्त वर्ष के संशोधित आंकड़े 
  3. अगले वित्त वर्ष हेतु प्रस्तावित आंकड़े 

बजट की तैयारी में वित्त मंत्री,वित्त सचिव,राजस्व सचिव और सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार आदि शामिल होते है l अनुच्छेद 365 के अनुसार बिना किसी कानून के कोई भी कर नहीं लगाया जा सकता और अनुच्छेद 266 के अनुसार बिना संसद की अनुमति के कोई भी व्यय नहीं किया जायेगा l राष्ट्रपति फरवरी के अंतिम कार्य दिवस पर बजट को लोकसभा में रखवाते है l लोकसभा में बजट केंद्र सरकार के वित्तमंत्री के द्वारा बजट पेश किया जाता है l बजट को लागू करने से पूर्व संसद के दोनों सदनों द्वारा यह पारित होना आवश्यक है l 

बजट के प्रकार -

भारत में 5 प्रकार के बजट प्रयोग में लाये जाते है l

  1. पारम्परिक या आम बजट 
  2. निष्पादन बजट 
  3. शून्य आधारित बजट 
  4. आउटकम बजट 
  5. जेंडर बजट  

पारम्परिक बजट 

वर्तमान समय के आम बजट का प्रारम्भिक स्वरुप पारम्परिक बजट था l इस बजट का मुख्य उद्देश्य कार्यपालिका पर विधायिका का नियंत्रण रखना होता है l वह यह नियंत्रण रखती है की कितना धन किस मद पर खर्च करना है l परन्तु इस बजट में व्यय से प्राप्त परिणामो का वर्णन नहीं होता इसलिए इस प्रकार का बजट भारत में अप्रासंगिक हो गया l अतः यह बजट एक लक्ष्य को ठीक प्रकार से प्राप्त करने में असफल रहा l इस  बजट की कमियों को पूरा करने के लिए निष्पादन बजट लाया गया l 

निष्पादन बजट 

कार्य और उसके परिणामो को आधार बनाकर निर्गत होने वाला बजट निष्पादन बजट कहलाता है l इसे कार्यपूर्ति बजट भी कहते है l इसमें सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजना को लक्ष्यन्मुखी बनाया जाता है l इसमें निष्पादन का मुल्यांकन भी किया जाता है l इस प्रकार के बजट पहली बार हूपर कमीशन की सिफारिश 1949 पर  USA में 1951 में शुरू किया गया था l भारत में इस प्रणाली   को 1968 में शुरू किया गया l

आउटकम बजट 

जब किसी वित्तीय वर्ष हेतु किसी विभाग अथवा मंत्रालय को कोई बजट आवंटित किया जाता है तो पहले से ही कुछ लक्ष्यों या भौतिक लक्ष्यों का निर्धारण इसलिए कर दिया जाता है क्योकि बाद में क्रियान्वयन की प्रक्रिया को समझा जा सके l साथ ही किसी भी स्तर पर कार्य को पूरा होने में देरी को रोकने के लिए सही समय पर सही बजट आवंटन कर दिया जाता है l चूँकि निष्पादन बजट में धन आवंटित करने के पश्चात् यह योजना अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पायी और इसकी जांच के लिए कोई ख़ास पैमाना नहीं निर्धारित किया गया था अतः इसी लिए 25 अगस्त 2005 को भारतीय इतिहास में पहली बार आउटकम बजट पेश किया गया जिसमे विभिन्न मंत्रालयों व विभागों ने आवंटित धनराशी का क्या और किस प्रकार उपयोग किया इसका विवरण देना आवश्यक था l 

शून्य आधारित बजट 

किसी विभाग या संगठन द्वारा प्रस्तावित व्यय की प्रत्येक मद पर पुनर्विचार करके प्रत्येक मद को शून्य मानते हुए नए सिरे से शुरू करना शून्य आधारित बजट कहलाता है l इस बजट को“सूर्य अस्त बजट (sun set budget)”भी कहा जाता है l आय कम होने और व्यय अधिक होने की परिस्थति में इस बजट को पेश किया जाता है l शून्य आधारित बजट का जन्मदाता “पीटर ए पायर”को माना जाता है जिन्होंने 1970 में इसका प्रतिपादन किया था| इस प्रणाली का सर्वप्रथम प्रयोग 1973 में अमेरिका के जार्जिया प्रान्त के बजट में तत्कालीन गवर्नर “जिमी कार्टर” द्वाराकिया गया था| बाद में 1979 में अमेरिका के राष्ट्रीय बजटमें भी इस प्रणाली को अपनाया गया | भारत में शून्य आधारित बजट की शुरूआत एक प्रमुख शोध संस्थान “वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद्” (Council of Scientific and Industrial Research) द्वारा किया गया था और केन्द्र सरकार ने 1987-1988 के बजट में इस प्रणाली को अपनाया था | इस प्रकार के बजट को तब अपनाया जाता  है जब आम बजट और निष्पादन बजट का क्रियान्वयन सही से नहीं हो पाता इस बजट में बढ़ते घाटे को नियंत्रित करने हेतु व्यय में कटौती की जाती है l 

जेंडर बजट 

इस बजट का प्रावधान 1984 में ऑस्ट्रेलिया में किया गया l वास्तव में जेंडर बजट महिला अधिकारिता व सशक्तिकरण और शिशु कल्याण की दिशा में योगदान देने हेतु सरकार की एक नीति का अंग है l जेंडर बजट के शुरुआत विगत कुछ ही वर्षो से की गयी है इसके माध्यम से सरकार महिलाओ के कल्याण , विकास और सशक्तिकरण के लिए व कार्यकर्मो के क्रियान्वयन हेतु प्रतिवर्ष बजट में एक निर्धारित राशि की व्यवस्था सुनिश्चित करती है।

भारत में बजट प्रणाली की शुरुआत -

भारत में बजट प्रणाली को शुरू करने का श्रेय लार्ड केनिंग को दिया जाता है क्योकि उन्ही के कार्यकाल में 1859 में वायसराय की कार्यकारिणी परिषद में एक विशेष सदस्य जिसे वित्त सदस्य कहा जाता है को सम्मिलित किया गया जिनका नाम सर जेम्स विल्सन था l भारत में बजट को सर्वप्रथम प्रस्तुत करने का श्रेय विल्सन को ही जाता है l इन्होने 7 अप्रैल 1860 को वायसराय की कार्यकारिणी परिषद के समक्ष भारत का प्रथम बजट पेश किया था , अतः जेम्स विल्सन को भारतीय बजट का संस्थापक भी कहा जाता है l

1860 के बाद से ही प्रतिवर्ष बजट वायसराय की कार्यकारिणी परिषद के समक्ष पेश किया जाने लगा l भारतीयों को उस समय बजट पर बहस करने का अधिकार नही दिया गया था l इसके पश्चात धीरे - धीरे भारतीयों को बजट की चर्चा में सम्मिलित होने और बजट पर बहस करने  का अधिकार दिया गया l 

स्वतंत्र भारत का प्रथम बजट -

स्वतंत्रता से पूर्व अंतरिम सरकार का बजट लियाकत अली खान (9 अक्टूबर 1946 - 14 अगस्त 1947) ने पेश किया था l भारत की स्वतंत्रता के पश्चात स्वतंत्र भारत का प्रथम बजट षड्मुखम शेट्टी द्वारा 26 नवम्बर 1947 में पेश किया गया था l वास्तव में यह मात्र अर्थव्यवस्था की समीक्षा थी l इसमें किसी भी प्रकार के कर का कोई प्रावधान नहीं था l यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मई 1948 तक साढ़े सात माह की अवधि के लिए था l गणतंत्र भारत का पहला बजट जॉन मथाई  ने पेश किया था l

आम बजट और रेल बजट का पृथकरण व एकीकरण  -

आम बजट और रेल बजट को अलग अलग प्रस्तुत करने की शुरुआत 1924 में आकवर्थ समिति 1921 की सिफारिश पर हुई और प्रथम बार आम बजट और रेल बजट को 1924-1925 में अलग अलग प्रस्तुत किया गया था l परन्तु 2016 में बीजेपी सरकार ने इस प्रथा को समाप्त कर दिया और आम बजट और रेल बजट का विलयकरण करके 2017-2018 के बजट में एक साथ प्रस्तुत किया l इसके बाद भी रेल एक स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करता रहेगा l

1924 में जहाँ रेल बजट आम बजट का 70% था वही 2016 तक यह केवल 14-15% ही रह गया अतः रेल बजट को आम बजट में सम्मिलित कर दिया गया l

सर्वाधिक बार बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री -

Morarji desai

भारत में सबसे अधिक बार आम बजट पेश करने का रिकॉर्ड वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के नाम है l जिन्होंने वित्त मंत्री के तौर पर 10 बार बजट पेश किया जिसमे से 8 पूर्ण बजट व दो अंतरिम बजट थे l मोरारजी देसाई एक मात्र इसे वित्त मंत्री थे जिन्हे 1964 और 1968 में अपने जन्मदिन के अवसर पर बजट पेश करने का अवसर प्राप्त हुआ l 

मोरारजी देसाई 1977 में बनी गैर कांग्रेसी सरकार में भारत के 4वे  प्रधानमंत्री बनने वाले पहले वित्त मंत्री थे l मोरारजी देसाई के बाद सबसे अधिक बार बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री पी चितंबरम है जिन्होंने कुल 8 बार संसद में बजट पेश किया l इसके पश्चात प्रवण मुखर्जी ,यसवंत सिन्हा,वाई वी चव्हाण और सी.डी. देशमुख ने 7-7 बार बजट पेश किया l

भारतीय प्रधानमंत्री बनने वाले वित्त मंत्री-

मोरारजी देसाई पहले इसे वित्त मंत्री थे जिन्हें 1977 में देश के प्रधानमंत्री(मार्च 1977- जुलाई 1979) होने का गौरव प्राप्त हुआ l प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने से पहले वे नेहरु व इंदिरा गाँधी की केबिनेट में वित्त मंत्री रहे l

इसके पश्चात् चौधरी चरण सिंह जो कि जनता पार्टी की सरकार में वित्त मंत्री रहे उन्हें देश के पांचवे प्रधानमंत्री (18 जुलाई -14 जनुअरी 1980) होने का  गौरव प्राप्त हुआ l

विश्वनाथ प्रताप सिंह जो की कांग्रेस सरकार में केंद्रीय वित्त मंत्री(1984-1987) रहे वे देश के आठवें प्रधानमंत्री (दिसंबर 1989- नवम्बर 1990) के रूप में चुने गये l

मनमोहन सिंह ने 21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक कांग्रेस की नरसिम्हा राव के सरकार में वित्त मंत्री का पदभार संभाला l मनमोहन सिंह ने 2004-2014 तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया lमनमोहन सिंह को देश के सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्रियो में गिना जाता है l मनमोहन सिंह अपनी "उदारीकरण की नीति" के लिए प्रसिद्द है l

भारतीय राष्ट्रपति बनने वाले वित्त मंत्री -

रामास्वामी वेंकटरमण जो इंदिरा गांधी सरकार में केन्द्रीय वित्त मंत्री (14 जून 1980- 15 जनवरी 1982) रहे वे इसे पहले वित्त मंत्री थे जिन्हें देश का राष्ट्रपति होने का गौरव प्राप्त हुआ l उन्हें देश का आठवां राष्ट्रपति चुना गया था l

प्रवण मुखर्जी जिन्होंने कांग्रेस सरकार में रहते हुए बजट पेश किया वे भारत के 13वें राष्ट्रपति (25 जुलाई 2012-25 जुलाई 2017) बनने वाले वित्त मंत्री थे l

प्रधानमन्त्री पद पर रहते हुए बजट पेश करने वाले भारत के प्रधानमन्त्री -

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु थे जिनके पास वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार था l 1958-1959 में उन्होंने बजट पेश किया और ऐसा करने वाले वो देश के पहले प्रधानमंत्री बन गये l

इसके पश्चात वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के त्यागपत्र के पश्चात तत्कालीन प्रधानमत्री इंदिरा गांधी ने वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण किया l अतः उन्हें देश की पहली महिला वित्त मंत्री और बजट पेश करने वाली पहले महिला होने का गौरव प्राप्त हुआ l 

वित्त मंत्री वी पी सिंह के पद से हटने के पश्चात राजीव गांधी 1987-1988 में बजट पेश करने वाले देश के तीसरे प्रधानमंत्री बन गये l

बजट पेश करने के समय व दिन में परिवर्तन -

सन 1924 से 1999 तक केन्द्रीय बजट की घोषणा फरवरी के अंतिम कार्यकारी दिवस पर शाम 5 बजे की जाती थी l इस प्रथा को 1924 में बैसल ब्लेकेट ने शुरू किया था l घोषणा का समय शाम 5 बजे बजे रखने का कारण यह था कि रातभर वित्तीय लेखा जोखा तैयार करने वाले अधिकारियों को आराम मिल सके l

Yashwant sinha

परन्तु 2000 में अटल बिहारी वाजपेय के नेतृत्व वाली NDA सरकार की वित्त मंत्री यशवंत सिंह ने केन्द्रीय बजट को सुबह 11 बजे प्रस्तुत करके इस प्रथा को समाप्त कर दिया l तबसे केन्द्रीय बजट सुबह 11 बजे ही पेश किया जाने लगा l

2017 से पूर्व केन्द्रीय बजट को फरवरी के अंतिम कार्यकारी दिवस पर पेश किया जाता था परन्तु नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने 2017 में केन्द्रीय बजट को फरवरी की पहले कार्यकारी दिवस पर पेश करने की प्रथा का आरम्भ किया l

बजट की गोपनीयता -

बजट प्रपत्रों की छपाई से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा खाने की रस्म निभाई जाती है l इस रस्म को निभाने के समय से लेकर बजट पेश होने तक बजट प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियो को वित्त मंत्रालय के दफ्तर नार्थ ब्लाक में ही रुकना पड़ता है ऐसा बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए किया जाता है l 

Hlwa rasam

 बजट प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों का अपने परिवार या अन्य किसी व्यक्ति से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं होता  और बजट प्रपत्रों की छपाई  भी 1980 से नार्थ ब्लाक में ही होती  है इससे बजट के दस्तावेजों  के लीक होने की आशंका नहीं होती l इससे पूर्व बजट दस्तावेजों की छपाई 1950 तक राष्ट्रपति भवन में की जाती थी l

प्रारंभ में बजट दस्तावेजो को अंग्रजी भाषा में बनाया जाता था परन्तु 1955-1956 से बजट के दस्तावेजो को हिंदी में भी तैयार किया जाने लगा l   

कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथ्य -

  • अंतरिम बजट  कहा जाता है - मिनी बजट , वोट ओन अकाउंट
  • वह राज्य जिसने सबसे पहले डिजिटल बजट पेश किया - उत्तराखंड
  • वित्त मंत्री जो RBI के गवर्नर भी थे - षड्मुखहम शेट्टी
  • वह देश जिसने जीरो बजट सिस्टम दिया है - यूएसए
  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने शून्य बजट प्रणाली स्वीकार की - 1977 में
  • भारत में जिस राज्य ने शून्य बजट प्रणाली को सबसे पहले स्वीकार किया था - आंध्र प्रदेश
  • भारत में जीरो आधारित प्रणाली कब लागू हुई - 1987-88 (सातवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान)
  • भारतीय बजट के घाटे में जो घाटा सबसे अधिक योगदान देता है - राजस्व घाटा
  • भारत में जिसने आय पर कर की शुरूआत की - जेम्स विल्सन
  • कृषि आय पर कर लगाया जा सकता है - राज्य सरकारों द्वारा
  • भारत का आर्थिक सर्वेक्षण हर साल प्रकाशित किया जाता है - वित्त मंत्रालय द्वारा
  • भारत में सेवा कर की शुरुआत हुई थी - 1994-95 में
  • भारत के संविधान में बजट को कहा जाता है - वार्षिक वित्तीय विवरण (अनुच्छेद 112)
  • वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत किया जाता है - भारतीय वित्त मंत्री द्वारा