पंचवर्षीय योजना


पंचवर्षीय योजना  की शुरुआत सर्वप्रथम 1928 में सोवियत संघ में जोसेफ स्टालिन  ने की। इसके बाद अन्य साम्यवादी एवं पूंजीवादी देशों में भी पंचवर्षीय योजना  के स्वरूप को स्वीकार किया गया। पंचवर्षीय योजना  भारत की राष्ट्रीय एवं केंद्रीकृत योजना है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1 अप्रैल 1951 को समाजवादी मॉडल पर आधारित देश की पहली पंचवर्षीय योजना  संसद के समक्ष प्रस्तुत की।

भारत में योजना आयोग पंचवर्षीय योजना  के कार्यान्वयन की देखरेख करता है जिसकी स्थापना 1950 में की गई थी l योजना आयोग का नाम बदलकर 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग कर दिया गया। पंचवर्षीय योजनाओं  का समय समय पर मूल्यांकन भी किया जाता है। पंचवर्षीय योजनाओं  का अंतिम अनुमोदन राष्ट्रीय विकास परिषद द्वारा किया जाता है जिसकी स्थापना 1952 में की गई थी।

प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951 - 1955)

प्रथम पंचवर्षीय योजना 1951 में शुरू हुई जो कि हेराल्ड डोमर समृद्धि मॉडल  पर आधारित थी। इस मॉडल में कृषि व सिंचाई  को प्राथमिकता दी गई। इसी योजना के तहत 1952 में सामुदायिक विकास कार्यक्रम 1953 में राष्ट्रीय प्रसार सेवा  की शुरुआत की गई। इसके अलावा इस योजना में भाखड़ा नागल दामोदर घाटी व हीराकुंज  ऐसी बहुउद्देशीय परियोजनाएं भी बनाई गई। यह एक सफल योजना थी जिसमें प्राप्त वृद्धि दर लक्ष्य वृद्धि दर से अधिक थी।

लक्ष्य वृद्धि दर - 2.1%

प्राप्त वृद्धि दर - 3.0%

दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956 -1961)

यह योजना पीसी महालनोविस मॉडल  पर आधारित थी। इस योजना में भारी उद्योगों  को बढ़ावा दिया गया। इसके तहत राउरकेला उड़ीसा भिलाई छत्तीसगढ़ वह दुर्गापुर पश्चिम बंगाल इस्पात कारखानों  की नींव डाली गई। इसके अलावा इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ,चितरंजन लोकोमोटिव  की स्थापना भी की गई। यह योजना भौतिकवादी योजना के नाम से भी जाने जाती है। इसी योजना के तहत भारत सहायता क्लब  की स्थापना की गई।

लक्ष्य वृद्धि दर - 4% 

प्राप्त वृद्धि दर - 4.27%

तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-1966)

यह आत्मनिर्भर स्फूर्तिवाद  योजना के रूप में भी जाने जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था को गतिमान व आत्मनिर्भर बनाना  था। यह योजना जॉन सैंडी व सुखमय चतुर्वेदी के समृद्धि मॉडल  पर आधारित थी। 1962 में चीन भारत युद्ध 1965 में भारत-पाक युद्ध 1965-66 में भीषण अकाल  के कारण यह योजना असफल रही। इस योजना के तहत पहली बार रुपया का अवमूल्यन  किया गया। इसी समय बोकारो ऑयल एंड स्टील इंडस्ट्री  की स्थापना रूस के सहयोग से झारखंड में की गई। 1964 में यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया  की स्थापना की गई। 1965 में भारतीय खाद्य निगम व कृषि कीमत आयोग  की स्थापना की गई। इस योजना के विफल होने के बाद भारत सरकार ने प्रथम, द्वितीय व तृतीय पंचवर्षीय योजनाओं  में ट्रिपल डाउन थ्योरी का अनुसरण किया।

यह योजना सबसे असफल योजना रही l 

लक्ष्य वृद्धि दर - 5.6%

प्राप्त वृद्धि दर - 2.4%

तृतीय पंचवर्षीय योजना की असफलता के कारण 1966 से 1969 तक 3 वार्षिक योजनाएं चलाई गई। इस समय को योजना अवकाश  कहते हैं। योजना अवकाश के दौरान ही 1966-67 में हरित क्रांति  की शुरुआत की गई।

चौथी पंचवर्षीय योजना (1969 - 1974)

चौथी पंचवर्षीय योजना  का उद्देश्य स्थिरता के साथ आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता की अधिकाधिक प्राप्ति  था। इस योजना के उपाध्यक्ष डॉ आर गॉडगिल  ने इसका प्रारूप तैयार किया था। जुलाई 1969 में 14 राष्ट्रीय वाणिज्य बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। इसके पश्चात 1974 में पहला नाभिकीय परीक्षण स्माइलिंग बुद्धा किया गया।  किसी योजना के अंतर्गत सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम 1973-74 व परिवार नियोजन कार्यक्रम  की शुरुआत की गई। मौसम की प्रतिकूलता व बांग्लादेशी शरणार्थियों का आगमन इस योजना की असफलता का कारण था।

लक्ष्य वृद्धि दर - 5.6%

प्राप्त वृद्धि दर - 3.3%

पांचवी पंचवर्षीय योजना (1974 -1979)

इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबी उन्मूलन और आत्मनिर्भरता को प्राप्त करना  था। 1978 में मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता सरकार के सत्ता में आने के बाद इस योजना को 1 वर्ष पूर्व ही बंद कर दिया गया। यह योजना डीपी धर मॉडल  पर आधारित थी और इस योजना के अंतर्गत 1974 में न्यूनतम आवश्यकता प्रोग्राम  की शुरुआत की गई। 2 अक्टूबर 1975 को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक  की स्थापना की गई। 1975 में 20 सूत्री कार्यक्रम  की शुरुआत हुई। 1977-78 में काम के बदले अनाज कार्यक्रम  की शुरुआत की गई l  1977 से 1980 तक गुन्नार मायर्डल के मॉडल  पर आधारित रोलिंग प्लान  की शुरुआत की गई क्योंकि पांचवी पंचवर्षीय योजना 1 वर्ष पहले ही जनता सरकार द्वारा समाप्त कर दी गई थी l इस समय योजना आयोग के उपाध्यक्ष डीटी लकड़वाला  थे और भारत में इसे लागू करने का श्रेय डीटी लकड़वाला  को ही जाता है। 1979 में ग्रामीण युवा स्वरोजगार परीक्षण कार्य कार्यक्रम ट्राईसीम  की शुरुआत की गई। बाद में इसे 1999 में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार परियोजना  में मिला दिया गया। यह योजना केवल 2 वर्ष ही चल सकी क्योंकि जनता सरकार गिर गई।  पुनः कांग्रेसी सरकार ने छठवीं पंचवर्षीय योजना  को 1980 में शुरू किया। पांचवी पंचवर्षीय योजना  में ही पहली बार गरीबी व बेरोजगारी  पर ध्यान दिया गया।

पांचवी पंचवर्षीय योजना में ही गरीबी हटाओ का नारा दिया गया।

लक्ष्य वृद्धि दर - 4.4%

प्राप्त वृद्धि दर - 4.8% 

छठी पंचवर्षीय योजना (1980 - 1985)

गरीबी निर्माण निवारण, आर्थिक विकास आधुनिकरण, आत्मनिर्भरता तथा सामाजिक न्याय  इस योजना के प्रमुख उद्देश्य थी इस योजना में ग्रामीण बेरोजगारी उन्मूलन हेतु संपूर्ण देश में कार्यक्रम चलाए गए जैसे IRDP, NERP, TRYSEM, द्वारका  DWA, CRA, RLEGP आदि l छठवीं पंचवर्षीय योजना  में गरीबी को नापने हेतु निर्देशांक बनाए गए जो 2400 कैलोरी ग्रामीण व 2100 कैलोरी शहरी क्षेत्रों हेतु निर्धारित किया गया। अर्थात इससे कम कैलोरी प्रतिदिन प्राप्त करने वाले गरीबी रेखा के नीचे माने जाएंगे। 1980 में 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण भी किया गया। 1982 में एक्ज़िम बैंक  और 2 अक्टूबर 1982 को नाबार्ड  की स्थापना की गई।

लक्ष्य वृद्धि दर - 5.2%

प्राप्त वृद्धि दर - 5.4%

सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985 - 1990) 

योजना का मुख्य उद्देश्य समृद्धि ,आधुनिकीकरण ,आत्मनिर्भरता और सामाजिक न्याय पर बल देना  था l इस योजना की रूपरेखा रामकृष्ण हैगर  ने तैयार की l इस योजना के काल में ही जवाहर रोजगार योजना 1989 में इंदिरा आवास योजना 1985-1986 में शुरू की गई। 1986 में स्पीड पोस्ट  की शुरुआत 1986 में काबार्ड  की शुरुआत गाँव के विकास हेतु व 1988 में SEBI की स्थापना की गयी l

लक्ष्य वृद्धि दर - 5.0% 

प्राप्त वृद्धि दर - 6.0%

राजनितिक आस्थिरता के चलते 1990-1992 में योजना लागू नही हो सकी और 1990-1991 व 1991-1992 में दो वार्षिक योजना चलाई गयी l 1991 में नर्सिम्हा राव  की सरकार के वित्त मंत्री मनमोहन सिंह  ने आर्थिक नीति की शुरुआत की ,अर्थात उदारीकरण ,वैश्वीकरण व निजीकरण की शुरुआत की l 1990 में लघु उद्योगों के विकास हेतु सिडबी  की स्थापना की गयी l

आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-1997)

आठवीं पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य मानव संसाधन का विकास करना  था l इस योजना की रुपरेखा प्रवण मुखर्जी  ने तैयार की l इसी योजना के कार्यकाल में 1 जनवरी 1995 में भारत विश्व व्यापार संगठन  का सदस्य बना l प्रधानमंत्री रोजगार योजना 1993 में शुरू की गयी l  

लक्ष्य वृद्धि दर - 5.6%

प्राप्त वृद्धि दर - 6.8%

नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997 - 2002)

इस पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य "सामाजिक न्याय व समानता के साथ आर्थिक समृद्धि" था। इसके साथ जीवन, स्वरोजगार सृजन, आत्मनिर्भरता,व क्षेत्रीय संतुलन जैसे चार क्षेत्रों पर विशेष बल दिया गया।

लक्ष्य वृद्धि दर - 7.0%

प्राप्त वृद्धि दर - 5.6%

दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002 - 2007) 

योजना आगत निर्गत मॉडल  पर आधारित थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबी का अनुपात 26 से घटाकर 21 तक लाना  था। वह 2011 तक 15% लाने का लक्ष्य लक्ष्य रखा गया। इसका उद्देश्य अगले 10 वर्षों में भारत की प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करना था। 

भारतीय अर्थव्यवस्था की सर्वाधिक वृद्धि दर 2006-07 में 9.6% थी।

लक्ष्य वृद्धि दर - 7.9% 

प्राप्त वृद्धि दर - 7.7%

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (1 अप्रैल 2007 से 31 मार्च 2012)

यह योजना तीव्र एवं समावेशी विकास की दृष्टिकोण  से बनाई गई थी, जिसमें जीडीपी का लक्ष्य 8% रखा गया, जबकि 7.5% की प्राप्ति हुई। यह योजना सी रंगराजन  द्वारा तैयार की गई थी।

five year plan         

12वीं पंचवर्षीय योजना (1 अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017)

 यह योजना तीव्र , सतत ,समावेशी विकास के लक्ष्य  के साथ शुरू की गई, जिसमें जीडीपी की वार्षिक वृद्धि दर 8% रखी गई। कृषि क्षेत्र में यह 4% उद्योग में 9.6% सेवा क्षेत्र में 10% रखी गई बचत दर जीडीपी का 36.2% निवेश दर 8.7% घोषित की गई। राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.2% तक रखने का लक्ष्य था। चालू खाता जीडीपी का 2.5% रखा गया। थोक मूल्य सूचकांक की औसत वृद्धि 4.5 से 5% तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया। इस योजना का उद्देश्य निर्धनता में 10% की कमी लाना था।

12वीं पंचवर्षीय योजना  अंतिम पंचवर्षीय योजना थी। इसके स्थान पर वर्तमान में नीति आयोग थिंक टैंक  के रूप में कार्यरत है। 

नीति आयोग एक सलाहकार निकाय है जिसका संविधान में कहीं पर भी उल्लेख नहीं दिया गया।

नीचे दी गयी तालिका में सभी पंचवर्षीय योजना का संक्षिप्त विवरण देखिए l

five year plan

कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  •  पंचवर्षीय योजनाओं को अंतिम मंजूरी देता है - राष्ट्रीय विकास परिषद 

  • भारत की प्रथम पंचवर्षीय योजना का प्रमुख लक्ष्य था - कृषि क्षेत्र का विकास

  •  भारत में गरीबी हटाओ का नारा दिया गया - पांचवी पंचवर्षीय योजना में

  • भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया गया - दूसरी पंचवर्षीय योजना में

  •  योजना अवकाश घोषित हुआ - तृतीय पंचवर्षीय योजना के पश्चात

  •  जवाहर योजना शुरू हुई - सातवीं पंचवर्षीय योजना में

  • रोजगार मापने हेतु मानक अपनाया गया - छठवीं पंचवर्षीय योजना में

  •  15 वर्ष की अवधि को ध्यान में रखकर बनाई गई - योजना छठवीं पंचवर्षीय योजना

  •  तृतीय योजना में सर्वाधिक बल दिया गया - कृषि क्षेत्र पर

  •  न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम की शुरुआत हुई - पांचवी पंचवर्षीय योजना में

  •  भारत की कृषि वृद्धि दर सर्वाधिक की - चौथी पंचवर्षीय योजना में

  •  इस योजना के दौरान आपातकाल लगाया गया व नए चुनाव हुए और जनता पार्टी की सरकार चुनी गई - पांचवी पंचवर्षीय योजना

  •  योजना केवल 4 वर्षीय थी - पांचवी पंचवर्षीय योजना

  • सबसे असफल पंचवर्षीय योजना - तृतीय पंचवर्षीय योजना

  •  सर्वाधिक सफल पंचवर्षीय योजना - दसवीं पंचवर्षीय योजना।

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